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Wednesday, December 23, 2009

स्वामी महफूज़ानंद महाराज जी आश्रम के अर्थ-प्रबंधक घोषित

सूचना

प्रिय भक्तों

बाबा समीरानन्द का शुभाषीश!

बहुत हर्ष का विषय है कि आज श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी के शिष्य बाबा स्वामी महफूज़ानंद महाराज जी को बाबा समीरानन्द आश्रम का अर्थ-प्रबंधक घोषित किया जाता है.

बाबा स्वामी महफूज़ानंद महाराज जी अपने ज्ञान, लगन, अर्थ-प्रबंधकीय अनुभव और आस्था के आधार पर इस महत्वपूर्ण पद को प्राप्त हुए हैं.

श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का उन्हें विशिष्ट स्नेह प्राप्त है.

बाबा स्वामी महफूज़ानंद महाराज जी अति अनुभवी एवं ज्ञानी हैं. उनका अध्ययन एवं अर्थ प्रबंधकीय अनुभव सभी को लाभांवित करेगा, ऐसा श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का विश्वास है.

आप सब उनका स्नेह एवं आशीष प्राप्त करें.



-जय श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी की-
-जय बाबा श्री ताऊआनंद महाराज की-
-जय बाबा स्वामी ललितानंद महाराज जी की-
-जय मां अदा चैतन्य कीर्ति महाराज साहिबा जी की-
-जय बाबा स्वामी महफूज़ानंद महाराज जी की-




-आश्रम मेनेजमेन्ट

Monday, December 14, 2009

मां अदा चैतन्य कीर्ति महाराज साहिबा जी आश्रम के महिला प्रभाग की महा-प्रबंधक घोषित

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प्रिय भक्तों

बाबा समीरानन्द का शुभाषीश!

बहुत हर्ष का विषय है कि आज श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी की शिष्या मां अदा चैतन्य कीर्ति महाराज साहिबा जी को बाबा समीरानन्द आश्रम के महिला प्रभाग की महा-प्रबंधक घोषित किया जाता है.

मां अदा चैतन्य कीर्ति महाराज साहिबा जी अपने ज्ञान, लगन, प्रबंधकीय अनुभव और आस्था के आधार पर इस महत्वपूर्ण पद को प्राप्त हुईं हैं.

श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का उन्हें विशिष्ट आशीष प्राप्त है.

मां अदा चैतन्य कीर्ति महाराज साहिबा जी अति अनुभवी एवं ज्ञानी हैं. उनका अध्ययन एवं प्रबंधकीय अनुभव सभी को लाभांवित करेगा, ऐसा श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का विश्वास है.

ध्यान दिया जाया कि उन्हें इस पद हेतु वह सभी सुविधायें एवं दर्जा प्राप्त होंगा जो कि एक महंत को प्राप्त होता है.

आप सब उनका स्नेह एवं आशीष प्राप्त करें.





-जय श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी की-

-जय बाबा श्री ताऊआनंद महाराज की-
-जय बाबा स्वामी ललितानंद महाराज जी की-
-जय मां अदा चैतन्य कीर्ति महाराज साहिबा जी की-



-आश्रम मेनेजमेन्ट

Wednesday, December 9, 2009

स्वामी ललितानंद महाराज जी आश्रम के महा-प्रबंधक घोषित-महंत का दर्जा

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प्रिय भक्तों

बाबा समीरानन्द का शुभाषीश!

बहुत हर्ष का विषय है कि आज श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी के शिष्य बाबा स्वामी ललितानंद महाराज जी को बाबा समीरानन्द आश्रम का महा-प्रबंधक घोषित किया जाता है.

बाबा स्वामी ललितानंद महाराज जी अपने ज्ञान, लगन, प्रबंधकीय अनुभव और आस्था के आधार पर इस महत्वपूर्ण पद को प्राप्त हुए हैं.

श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का उन्हें विशिष्ट स्नेह प्राप्त है.

बाबा स्वामी ललितानंद महाराज जी अति अनुभवी एवं ज्ञानी हैं. उनका अध्ययन एवं प्रबंधकीय अनुभव सभी को लाभांवित करेगा, ऐसा श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी का विश्वास है.

ध्यान दिया जाया कि उन्हें इस पद हेतु महंत का दर्जा प्राप्त रहेगा.

आप सब उनका स्नेह एवं आशीष प्राप्त करें.






-जय श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी की-
-जय बाबा श्री ताऊआनंद महाराज की-
-जय बाबा स्वामी ललितानंद महाराज जी की-




-आश्रम मेनेजमेन्ट

भक्तों की वाणी : आश्रम के लिए सर्वोपरि!!

हमारे आश्रम में भक्तों की वाणी को विशेष महत्व दिया जाता है.

हम समझते हैं कि भक्तों से हम हैं, हम से भक्त नहीं.

नोट:

-भक्त अपने मन की बात खुल कर कहें.

-यहाँ भक्तों का मजाक नहीं उड़ाया जाता.

-भक्त और भगवान के बीच हम सेतु मात्र हैं.


भक्त १:

मैं पिछले बहुत दिनों से अपना चिट्ठा लिख रहा था मगर कोई पढ़ता ही नहीं था. हताश होकर बाबा की शरण में आया. उन्होंने एग्रीगेटरर्स पर मेरा पंजीकरण कराया और शुभाशीष दिये. अब ढ़ेरों पाठक हैं. बाबा जी की जय. बाबा जी के आश्रम की अंगूठी चमत्कारी सिद्ध हुई.


भक्त २:

बाबा की विशेष कृपा है. जैसे ही हवन करवाया, तुरंत टिप्पणियों का अंबार लग गया और बाबा ने इसके गुर सिखाये. बाबा जी के जितने भी गुण गाऊँ, कम है. सर्वमनोकामना सिद्धि यंत्र बाबा जी से प्राण प्रतिष्ठा करवा कर ब्लॉग पर लगाने से अद्भुत परिणाम मिले.


भक्त ३:

बाबा जी लिखने पढ़ने का सलीका सिखाया. लोगों का आदर करना सिखाया. बाबा जी ने मुझे सही और सार्थक जीवन की राह दिखाई. उनके द्वारा दिया गया लॉकेट हर वक्त धारण रखता हूँ. इससे मुझे जबरदस्त आत्मविश्वास मिलता है.


बाबा जी जिन्दाबाद.

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-बाकी भक्तों की वाणी भी लगातार प्रकाशित की जाती रहेगी.

-भक्तों की वाणी को बाबा श्री के प्रवचन के पहले जगह मिलेगी.

-बाबा अपने शिष्य बाबा ताऊ आनन्द को भी तभी प्रवचन करने की अनुमति देते हैं, जब भक्त बोल चुके हों.
शिष्यों को भक्तों से उपर जगह दी जाये, कम से कम इस आश्रम की यह परंपरा नहीं.


-आश्रम मेनेजमेन्ट